Alive or breathing quotes

Are You Alive Or Just Breathing

क्या तुम ज़िंदा हो? या तुम्हारे सिर्फ़ साँसे चल रही है।

यह सुनते वक़्त मन मे बहुत गड़बड़ हो सकती है, की ज़िंदा होना और साँस का चलना तो एक ही है, तो फिर ऐसा क्यू कहा मैंने। बहुत आसान है समझना।

तुम जिसे ज़िंदगी कहते हो वह ज़िंदगी है ही नहीं, तुम्हें जो आज तक बताया गया तुमने उसेही ज़िंदगी समझ लिया। इस दुनिया में ज़िंदगी को जीने वाले बहुत ही कम लोग है, और सिर्फ़ साँस लेने वाले बहुत लोग है।

आपने कभी सोचा है की असल मे ज़िंदगी होती क्या है। मुझे एक बात कहिए की आप खुदके लिए जी रहे हैं या किसी और के लिए? आपको जो पसंद है वोह कर रहे है या कोई आपको काम पे लगा रहा है?

अगर आप दूसरे के हिसाब से ज़िंदगी जी रहे है तो आपके साँसे किसी और के लिए ज़ाया हो रही है। अगर आप अपनी ज़िंदगी मे खुदके लिए कुछ करके ही रहे हाई तो आपके सांसे आपके लिए चल रही है।

यही फ़रक होता है, ज़िंदगी जीने का और गवाने का।

जितना ज़्यादा मैं इंसानो के बारेमे जानती जाती हूँ, उतना ही मुझे कुत्तोसे ज़्यादा प्यार होता है।

असल में यह लाइन बहुत बुरी है, और अपमानित भी। कुत्तोंका इससे बड़ा और अपमान क्या हो सकता है, जब उन्हें इंसानोंके साथ तुलना मे उतारा जाता हों। थोड़ी तो इज्जत करो कुत्तोंकि उन्होंने भला इंसानोंका क्या बिगाड़ा है। कुत्ते भी कहते होंगे की हमपर बस एक एहसान करना की, हमें कभी इंसानों के तुलना मे मत उतारना।

कोई और जानवर होता तो भी ठीक था लेकिन इंसान? इतने भी पाप नहीं किए हमने की हमारी इंसानोके साथ तुलना कीयी जाए।वैसे कुत्ते भी तो सही कह रहे है, बताओ कोई अच्छा सा उदाहरण जिससे इंसान अच्छा साबित हो सके। इस दुनिया मे लोगोंने कभी भी अछे लोगोंको जीने नहीं दिया है। बहुत सारे लोग आए थे इस पृथ्वी पर जो इस दुनिया को बदल सकते थे। पहलेसे ज़्यादा खूबसूरत बना सकते थे, उन्हें इंसानों ने जिन्हें नहीं दिया। और फिर कहते है की दुनिया बहुत बुरी है।

तुम भी तो सौ बार सोचते हो जब किसी की मदत करनी होती है।और आज इस दुनिया में इंसानों के लिए सबसे भरोसेमंद सिर्फ़ एक ही साथीदार है जिसे हम इंसानोकि की बेशर्मी छुपाने के लीये हमे कुत्ते कहते है।आज के जमने मे कुत्तोंसे ज़्यादा भरोसा किसपे नहीं रखा जा सकता।

कभी कभी आपके ज़िंदगी में कुछ बुरा होने की भी ज़रूरत होती है, जिस वजहसे आप की ज़िंदगी मे बदलाव आए और आप आगे बढ़े।

हमने हमेशासे यही चाहा है की हमारे साथ सिर्फ़ अच्छा हों। हमारे साथ कभी कुछ बुरा ना हो। लेकिन एक बात याद रखना जिन लोगोंके ज़िंदगी मे कभी कुछ बुरा नहीं होता उनकी ज़िंदगी में कभी कुछ बदलाव नहीं होते। वोह ज़िंदगी भर वैसे के वैसे ही रहते है।किसी भी बड़े आदमी का उदाहरण ले चाहे बात अध्यात्म की हो या जीवन के उद्योग में सफलता का हो, कोई भी इंसान तबतक बदलता नहीं जबतक उसके साथ कुछ बुरा नहीं होता।

अभी कुछ लोग कहेंगे की ऐसा नहीं होता। तो मुझे एक बात बताओ, अगर आपके ज़िंदगी में सबकूछ अच्छा या साधारण चल रहा हो, तो क्यू भला आप कुछ नया करने की सोचोगे। यह बुरे पल ही होते है, जो इंसान को बदलने में मदत करते है। इसलिए अपने बुरे पलोंका भी स्वागत कीजिए। वोहि आपकी ज़िंदगी बदल सकती है।

कुछ बोलो मत बस उन्हें ग़लत साबित कर दो।

हमेशा याद रखना दुनिया में वही लोग तर्क करते है, जिन्हें खुदके बातोंपर भी विश्वास नहीं होता। वह तर्क इसलिए करते है, ताकी उन्हें खुदके बातोंपे विश्वास हो जाए। यानी तुम्हारे तर्क से तुम किसी और को इसलिए मना रहे हो क्योंकि अगर वोह तुम्हारी बात मान गया तो तुम्हें भी थोड़ी राहत मिल जाती है, है ना?अगर यक़ीन नहि होता तो आपने कीये हुए किसी भी एक तर्क के बारे मे याद करिए। और बस सोचिए की अगर सामने वाला तुम्हारी बातोंको पहले ही लाइन मे मान जाता तो तुम्हें थोड़ा भी मज़ा नहीं आता।

यद कीजिए ऐसा आपके साथ जरुर कभी हुआ होगा की सामने वाला जल्दी मान गया फिर भी आप उसे अपनी बात समझाते रहे हो। यह क्यू और कैसे होता है।अगर सामने वाला बंदा आपकी बात पहलेसेहि मानने को राज़ी है तो क्यू आप फ़िरभी उसे समझाने के कष्ट उठाते है। क्योंकि अभी तक आपको भी खुदके बातोंपे भरोसा नहि है इसलिए। अगर आपको किसिको ग़लत साबित करना है, तो अपने कर्मों से करो।

ऐसे क़र्म करे जिससे आपकी सारी बाते सही दिख जाए। और जब ऐसा होगा तब आपको किसिको कुछ समझानेकी ज़रूरत नहि पड़ेगी। वोह आप को देखकर खुद समझ जाएगा। इसलिए बोलने पर अपना समय बरबाद मत कीजिए। बस काम ऐसे करे जिससे सामने वाला अपने आप ग़लत साबित हो जाए।

उसके लिए कभी मत रोईए जिसने आपकी हंसीं को मार डाला हो।

आज भी इंसान जितना मूर्ख जानवर ढूँढना मुश्किल है। हम कहते है की इंसानों बहुत तरक़्क़ी कर लियी। लेकिन फिरभी बहुत छोटी छोटी बातोंसे परेशान रहता है। हा अगर वजह सही हो तो रोना कोई बुरी बात नहि है। लेकिन बिना वजहके रोना ग़लत है, और तो और ग़लत वजहके लिए रोना तो उससे भी बुरा है।

अगर आपका कोई अच्छा, प्यारा दोस्त आपको छोड़के चला जाए जिससे आपकी बहुत मदत कीयी हो। तो रोना धोना हम समझ सकते है। लेकिन अगर आप किसी ऐसे इंसान के लिए तो रहे हो जिसने आपका सिर्फ़ फ़ायदा ही उठाया हो। उसके लिए कैसे भला आप रो सकते है।

तो यही बात आज कल हमें प्यार के चक्कर मे दिखता है, हाँ उसे हम प्यार नही कह सकते लेकिन करे भी क्या लोग इतने ना समझ है की ऐसे ही अछे शब्द इस्तेमाल करने पड़ते है। अगर आप उसके लिए रोएँगे जिसकी वजहसे आप की हँसी आपसे ख़फ़ा हो गयी, तो इससे बड़ी बेवक़ूफ़ी और क्या हो सकती है। तो इसलिए जाने वाले को जाने दे। क्योंकि रुकवानेसे भी तेरा नहि होने वाला। इसलिए अपनी हँसी को कभी भी किसिके लिए भी दूर मत कर देना।

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